मेरी अधूरी कहानी
(Part – III)
अपने प्यार को सच्चा साबित करने के लिए मैंने खुद को खुद का ही सहारा दिया। वो कहते हैं ना जब तक आप अपनी मदद खुद नहीं करेंगे , तब तक खुदा भी आपकी मदद नहीं करता। ----------------
मेरी मेहनत और लोगों का साथ , रंग लाया। मैंने तुम्हारा इम्तेहान पास कर लिया और अपनी ही नजरो में अपना खोया हुआ आत्मसम्मान वापस पाया। लेकिन अब तक मैं बाकी लोगो की तरह असमंजस में था कि तुम्हारे साथ ज़िन्दगी की शुरुआत कैसे की जाए ? नौकरी भी नहीं मिल रही थी , आखिर में सोचा पोस्ट ग्रेजुएशन कर लेते हैं , कुछ साल और,तुम्हारे साथ कॉलेज में वक़्त बिताने का मौका मिलेगा , शैतानियां कर पाउँगा , तुम्हारी सहेलियों को , बहनो को निहार पाउँगा वरना नौकरी पे लगने के बाद ये मौका कहाँ मिलेगा। मैं यहाँ स्वीकार करता हूँ की तुम्हारा ४४० वोल्ट झटके वाला रूप कमाल का है। मुझे लगने लगा था कि तुम बस मोटे मोटे लेंस ही लगाती रहोगी , पर तुम्हारा sunglasses वाला रूप क्या निखर के आता। तुम्हारा मॉडर्न रूप इन सबपे भारी था। मैंने तुम्हारे साथ रहने के लिए फिर से SIES कॉलेज में M.Sc. के लिए आवेदन किया किन्तु मेरिट लिस्ट में नाम न आने की वजह से मुझे तुम्हारा साथ छोड़ने का फैसला लेना पड़ा। मेरी भी क्या किस्मत है , मैंने साल बर्बाद न होने की डर से PGDIT ( पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ) में दाखला लिया। तुमसे सीखी हुई कई बातें मुझे PGDIT में फिर से पढ़ने को मिली जिन्हें समझने में कोई परेशानी नहीं होती । तुम्हारे साथ रहकर सोचने और समझने का जो मेरा तरीका बन गया था , PGDIT में मुझे बहुत काम आया। इस तरह भले ही मैं तुमसे दूर हुआ था , लेकिन तुम मेरे अंतःमन में, विचारों में ,इस कदर समा गयी हो कि लगभग हर बात मैं तुम्हारे नजरिये से देखता। प्रैक्टिकल लैब में तुम्हारे साथ रहकर 'धैर्य' क्या होता है इसका एहसास भी तुमने बखूबी कराया। तुम्हारा नजरिया PGDIT में ही नहीं मेरी निजी ज़िन्दगी में भी सकारात्मक असर बनाये हुए था। PGDIT के मेरे ग्रुप ने तुम्हारे प्रति मेरी निष्ठां की काफी तारीफ़ की।
PGDIT के रिजल्ट के बाद मेरे घरेलू हालात ऐसे थे कि मुझे जल्द से जल्द नौकरी पानी थी और घर के आर्थिक मामलो में अपना योगदान देना था। इन्टरनेट पे naukri.com और timesjobs.com के जरिये कई जगह आवेदन करने करने के बाद मुझे एक साथ दो नौकरियों में से एक का चयन करना पड़ा। अपने प्यार से वापस जुड़ने के लिए, मैंने सॉफ्टवेर टेस्टिंग की नौकरी को छोड़ने का और IIT-Bomay - पवई स्थित THINKLABS Technosolutions Pvt. Ltd. में आधी तनख्वाह में बतौर रोबोटिक्स ट्रेनर की नौकरी करने का फैसला लिया। मैं काफी खुश था कि जिस ' PHYSICS ' को मोहब्बत मानते आया था , बचपन से जिसके साथ होने के ख्वाब देखते आया था, उसके उन्नत प्रौद्योगिकी (Advanced Technology ) पर मुझे काम करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। वहाँ IIT के माहौल में मुझे अपनी खोज- रूपी मोहब्बत को आकार देने का अवसर प्राप्त हुआ । ज़िन्दगी काफी बढ़िया गुजर रही थी अपने प्यार के साथ , और मनोबल दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा था। वहाँ काम करते हुए मैंने ' PHYSICS ' के प्रति अपने प्रेम के चलते काफी वाह वाह बटोरी और हमारे प्यार की नाव (मोटर बोट मॉडल ) वहीँ छोड़ आया।
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