Wednesday, August 24, 2016

मेरी अधूरी कहानी (भाग १)

मेरी अधूरी कहानी
(Part – I)

क्या कश्मकश है !! जब तुम्हारे पास तुम्हारी गलियो में था , मोहल्ले में था , हर वक़्त , हर लम्हा तुम्हारा ख्याल होता थाख़ुशी से कम पर गम से ज्यादा ! तब ये नहीं जानता था, मैं तुमसे इतना दूर चला जाऊंगा और हैरानी ये की दूर होकर कुछ ज्यादा ही पास हो गयी हो ! मुझे कोई हिचकिचाहट नहीं है ये कहने में कि   I Love You .
हमारी मुलाकात भी क्या अजीब थी, सालों school में साथ रहे, लेकिन तुम्हारा नाम तक नहीं जानता था ! वहां बस तुम्हारे खानदान उससे जुड़े बड़ी बड़ी हस्तियों के नाम और उनकी उपलब्धियों के बारे में सुनने को मिलता ! उनकी  उपलब्धियों को सुनकर तीव्र इच्छा होती कि काश मैं भी उस वंश का हिस्सा बन सकूँ ! जैसे जैसे बड़े होते गए तुम्हारे सौंदर्य में निखार आता गया , और मैं बेवजह तुम्हारी ओर खींचता चला गया ! तुमसे जुडी बातों को सुनने में , एक अलग ही आनंद आता ! कई बार तो ऐसे वर्णन मिलते तुम्हारे कारनामों को लेकर, जो मेरी समझ से परे होता था , फिर भी तुम्हे परी मानकर , उन बातों की सुखानुभूति करता !

मजेवाले दिन थे वो, तुम्हारे लिए मेरी दीवानगी को देखकर जूनियर कॉलेज में ही मेरा नामकरण कर दिया गया था , और जब जब मुझे उस उपनाम से बुलाया जाता मेरी छाती चौड़ी हो जाती , आँखों में एक चमक सी जाती ! जूनियर कॉलेज के अंतिम सफर में मैंने तुम्हे छोड़कर किसी और राह पे जाने का फैसला लिया परंतु तुम्हारा दबदबा इतना है कि तुम वहाँ भी गयी , और मैं चाहकर भी तुमसे पीछा छुड़ा सका ! इन सबके पीछे तुम्हारे वंश का बड़ा हाथ था! तुम्हारे परिवार के प्रति मेरी बस नाम की रूचि को देखकर तुम्हारी वंश प्रणाली ने मुझे , मेरे द्वारा  तय किये हुए सफर मंजिल से कोसों दूर कर दिया !

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